"गबन" मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखा गया एक प्रसिद्ध हिंदी उपन्यास है, जो समाज की जटिलताओं और मानवीय कमजोरियों को उजागर करता है। यह उपन्यास मुख्य रूप से एक व्यक्ति की अंदरूनी संघर्ष और उसकी नासमझी के परिणामों को दर्शाता है।
कहानी का सारांश:
यह कहानी रघुनाथ नामक एक युवा पुरुष के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक ईमानदार और मेहनती व्यक्ति है, लेकिन उसकी इच्छाएँ और महत्वाकांक्षाएँ उसे गलत रास्ते पर डाल देती हैं। रघुनाथ का विवाह जारू नामक एक लड़की से होता है, जो बहुत ही सुंदर और गृहस्थी में माहिर है। रघुनाथ अपनी पत्नी को खुश रखने के लिए उसे महंगे कपड़े और सामान देना चाहता है, लेकिन उसके पास पैसे की कमी होती है।
इसी बीच रघुनाथ को अपनी स्थिति से बाहर निकलने का एक तरीका दिखाई देता है। वह एक दुकानदार मालती के द्वारा एक धोखाधड़ी की योजना में शामिल हो जाता है और कुछ पैसों के लिए अपनी ईमानदारी से समझौता करता है। यह उसकी ज़िंदगी में भारी गबन का कारण बनता है। वह उधारी में डूब जाता है और यह सब उसकी व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन को प्रभावित करता है।
उपभोक्तावाद, सामाजिक दबाव, और व्यक्तिगत दोषों के परिणामस्वरूप रघुनाथ की जीवनशैली और परिवार में गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। गबन के इस कृत्य ने न केवल उसे बल्कि उसके परिवार को भी संकट में डाल दिया। अंत में रघुनाथ को समझ में आता है कि उसने अपनी महत्वाकांक्षाओं और झूठ के कारण अपनी ज़िंदगी को कैसे बर्बाद किया।
"गबन" प्रेमचंद की उन रचनाओं में से एक है जो मानवीय भावनाओं, समाजिक समस्याओं और नैतिकता के बीच के संघर्ष को बहुत ही बारीकी से चित्रित करती है। यह उपन्यास पाठकों को अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के निर्णयों पर सोचने के लिए प्रेरित करता है।