"तितली" जयशंकर प्रसाद की एक प्रसिद्ध कविता है, जिसमें उन्होंने तितली के माध्यम से जीवन की नश्वरता, सुंदरता और स्वतंत्रता को चित्रित किया है। यह कविता जीवन के क्षणभंगुरता और उसकी रहस्यमयता का प्रतीक है।
कविता का सारांश:
कविता में तितली का चित्रण एक सुंदर और स्वतंत्र प्राणी के रूप में किया गया है, जो अपनी जीवन यात्रा में फूलों से फूलों तक उड़ती रहती है। तितली का जीवन अत्यंत संक्षिप्त और नाजुक होता है, लेकिन वह अपनी पूरी स्वतंत्रता के साथ जीवन जीती है। यह उसकी अद्वितीयता और सुंदरता को दर्शाता है, जो नश्वर होते हुए भी एक तरह से सर्वश्रेष्ठ होती है।
प्रसाद जी ने तितली के माध्यम से यह संदेश दिया है कि जीवन कितना भी क्षणिक और अस्थिर क्यों न हो, हमें उसे पूरी तन्मयता और आनंद के साथ जीना चाहिए। तितली के छोटे से जीवन में भी उसके आनंद, उसकी स्वतंत्रता और सौंदर्य की जो विशेषता है, वही जीवन के सच्चे और वास्तविक पहलू हैं।
कविता का संदेश:
- जीवन की अस्थिरता: तितली का जीवन संक्षिप्त और नश्वर होने के बावजूद, वह अपनी पूरी स्वतंत्रता और सुंदरता के साथ जीवित रहती है।
- स्वतंत्रता और सुंदरता: तितली की उड़ान जीवन के सर्वोत्तम रूप को दर्शाती है, जो सुंदरता और स्वतंत्रता का प्रतीक है।
- क्षणिकता: जीवन की अस्थिरता को स्वीकार करते हुए, हमें हर पल का मूल्य समझकर उसे जीना चाहिए।
जयशंकर प्रसाद की कविता "तितली" जीवन के महत्वपूर्ण संदेशों को सरल और सुंदर तरीके से प्रस्तुत करती है, जिसमें प्रकृति, स्वतंत्रता, और जीवन की नश्वरता का गहरा चित्रण किया गया है।